पुरानी विरासत से ग्रामीण समृद्धि का नया मॉडल

11:20:21 2026-07-24
23 जुलाई 2026 को चीन के हेनान प्रांत के वुगांग शहर में, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत लौकी दग्ध चित्रकला (गर्म लोहे से लौकी पर चित्र बनाने की अनोखी पारंपरिक कला) की विरासतकर्ता लू फेंगगे अपनी कलाकृति बना रही हैं। 1997 में गांव लौटने के बाद लू ने इस कला को संरक्षित करते हुए 'गैर-भौतिक विरासत + लौकी खेती + सांस्कृतिक पर्यटन' की एकीकृत उद्योग श्रृंखला विकसित की है। इस मॉडल से न केवल कला बची रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उनकी आय भी बढ़ रही है!
23 जुलाई 2026 को चीन के हेनान प्रांत के वुगांग शहर में, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत लौकी दग्ध चित्रकला (गर्म लोहे से लौकी पर चित्र बनाने की अनोखी पारंपरिक कला) की विरासतकर्ता लू फेंगगे अपनी कलाकृति बना रही हैं। 1997 में गांव लौटने के बाद लू ने इस कला को संरक्षित करते हुए 'गैर-भौतिक विरासत + लौकी खेती + सांस्कृतिक पर्यटन' की एकीकृत उद्योग श्रृंखला विकसित की है। इस मॉडल से न केवल कला बची रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उनकी आय भी बढ़ रही है!
23 जुलाई 2026 को चीन के हेनान प्रांत के वुगांग शहर में, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत लौकी दग्ध चित्रकला (गर्म लोहे से लौकी पर चित्र बनाने की अनोखी पारंपरिक कला) की विरासतकर्ता लू फेंगगे अपनी कलाकृति बना रही हैं। 1997 में गांव लौटने के बाद लू ने इस कला को संरक्षित करते हुए 'गैर-भौतिक विरासत + लौकी खेती + सांस्कृतिक पर्यटन' की एकीकृत उद्योग श्रृंखला विकसित की है। इस मॉडल से न केवल कला बची रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उनकी आय भी बढ़ रही है!
23 जुलाई 2026 को चीन के हेनान प्रांत के वुगांग शहर में, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत लौकी दग्ध चित्रकला (गर्म लोहे से लौकी पर चित्र बनाने की अनोखी पारंपरिक कला) की विरासतकर्ता लू फेंगगे अपनी कलाकृति बना रही हैं। 1997 में गांव लौटने के बाद लू ने इस कला को संरक्षित करते हुए 'गैर-भौतिक विरासत + लौकी खेती + सांस्कृतिक पर्यटन' की एकीकृत उद्योग श्रृंखला विकसित की है। इस मॉडल से न केवल कला बची रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उनकी आय भी बढ़ रही है!
23 जुलाई 2026 को चीन के हेनान प्रांत के वुगांग शहर में, गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत लौकी दग्ध चित्रकला (गर्म लोहे से लौकी पर चित्र बनाने की अनोखी पारंपरिक कला) की विरासतकर्ता लू फेंगगे अपनी कलाकृति बना रही हैं। 1997 में गांव लौटने के बाद लू ने इस कला को संरक्षित करते हुए 'गैर-भौतिक विरासत + लौकी खेती + सांस्कृतिक पर्यटन' की एकीकृत उद्योग श्रृंखला विकसित की है। इस मॉडल से न केवल कला बची रही है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है और उनकी आय भी बढ़ रही है!