गाजा के नाम पर ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’: पहल या राजनीतिक प्रदर्शन?

गत गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में अमेरिका के नेतृत्व में गाजा पट्टी के लिए एक नई तथाकथित “बोर्ड ऑफ़ पीस”की शुरुआत की गई। लेकिन जिस मूल मुद्दे को केंद्र में रखकर इस परिषद का गठन किया गया, उसके सबसे अहम पक्षकार ही इस समारोह में अनुपस्थित रहे। न तो इज़राइल का कोई प्रतिनिधि मौजूद था और न ही फिलिस्तीन का। यह स्थिति अपने आप में एक गंभीर विडंबना को उजागर करती है और इस पूरी पहल की मंशा तथा विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगा देती है। ज़रा ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि जो देश स्वयं बार-बार सैन्य संघर्षों में शामिल रहा है और वैश्विक स्तर पर टैरिफ़ जैसे मुद्दों पर अन्य देशों से टकराव की नीति अपनाता रहा है, यदि वही देश “बोर्ड ऑफ़ पीस”का नेतृत्व करे, तो क्या उससे वास्तविक और टिकाऊ शांति की उम्मीद की जा सकती है। यही वह मूल प्रश्न है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर व्यापक संदेह को जन्म दिया है। हालिया प्रामाणिक विश्लेषणों के समग्र आकलन से यह संकेत मिलता है कि इस आयोग के गठन के उद्देश्य, उसकी कार्यप्रणाली और संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर मतभेद और विवाद मौजूद हैं।

26-Jan-2026
जापान को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं पर चीन का निर्यात नियंत्रण: एक वैध और उचित सुरक्षा दायित्व

हाल ही में चीन ने कानून के तहत जापान को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण को और कड़ा कर दिया है। इसके प्रत्युत्तर में जापान ने चीन पर "आर्थिक दबाव" डालने का आरोप लगाते हुए इस कदम का विरोध किया और इन उपायों को वापस लेने की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चीन इस प्रकार के आरोपों का "कड़ा विरोध करता है और उन्हें स्वीकार नहीं करेगा"। चीनी मंत्रालय ने जोर दिया कि चीन का यह कदम किसी भी तरह से "दबाव" नहीं, बल्कि जापान की बढ़ती खतरनाक गतिविधियों के मद्देनज़र उठाया गया एक वैध, उचित और आवश्यक कदम है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के चीन के दायित्व के अनुरूप है।

16-Jan-2026