द वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कांफ्रेंस यानी डब्ल्यूएआईसी 2026 का सफल समापन हो चुका है। रिकॉर्ड कंपनियों और भागीदारों की भागीदारी के चलते यह कांफ्रेंस बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हाल ही में, भारतीय मीडिया आउटलेट ईस्टमोजो के उप-प्रधान संपादक श्री अमित कुमार ने चाइना मीडिया ग्रुप के हिंदी विभाग का दौरा किया।
साल 2026 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ है। इस अवसर को चीन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।
17 जुलाई से 20 जुलाई तक वर्ल्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्रेंस आयोजित हुआ।
17 जुलाई 2026 तक, चीन के शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश के आलाशानखो और ह्वोअरक्कोस दो सीमा पोर्टों से चलने वाली चीन-यूरोप रेल एक्सप्रेस ट्रेनों की कुल संख्या 10,000 से ज्यादा हो गई है, जो पश्चिम की ओर चीन के खुलने की तीव्र गति दर्शाती है।
चीन अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को लगातार नई दिशा दे रहा है। इसी कड़ी में देश ने पारंपरिक गांवों और ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और उपयोग से जुड़े मानकों को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित तथा व्यावहारिक बनाने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रपति शी के भाषण को सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
चीन की छमाही की आर्थिक प्रदर्शन रिपोर्ट जारी होने के बाद, विदेशी मीडिया में "उम्मीदों से बेहतर" और "मजबूत लचीलापन" जैसे वाक्यांश प्रमुखता से इस्तेमाल किए गए। आंकड़ों से पता चलता है कि चीन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) इस छमाही में 69.57 ट्रिलियन युआन तक पहुंच गया, जो स्थिर कीमतों पर पिछले वर्ष की तुलना में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और वैश्विक स्तर पर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि के मामले में शीर्ष पर है। इससे न केवल "15वीं पंचवर्षीय योजना" की शुरुआत के लिए एक ठोस आधार तैयार हुआ, बल्कि सुस्त वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण आत्मविश्वास का संचार हुआ। इस वर्ष वैश्विक विकास दर धीमी हुई है और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आइएमएफ) ने वैश्विक विकास दर का अपना पूर्वानुमान घटाकर 3 फीसदी कर दिया है, जबकि चीन की विकास दर का पूर्वानुमान बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया है। यह प्रदर्शन रिपोर्ट बाहरी दुनिया की चीन के प्रति सकारात्मक उम्मीदों की पुष्टि करती है।
एक सौ पांच साल पहले पूरी दुनिया उथल-पुथल से भरी थी। तब दुनिया के कई हिस्सों में मार्क्स और लेनिन की विचारधारा लोगों को आकर्षित कर रही थी।