गत गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में अमेरिका के नेतृत्व में गाजा पट्टी के लिए एक नई तथाकथित “बोर्ड ऑफ़ पीस”की शुरुआत की गई। लेकिन जिस मूल मुद्दे को केंद्र में रखकर इस परिषद का गठन किया गया, उसके सबसे अहम पक्षकार ही इस समारोह में अनुपस्थित रहे। न तो इज़राइल का कोई प्रतिनिधि मौजूद था और न ही फिलिस्तीन का। यह स्थिति अपने आप में एक गंभीर विडंबना को उजागर करती है और इस पूरी पहल की मंशा तथा विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न लगा देती है। ज़रा ठहरकर सोचने की ज़रूरत है कि जो देश स्वयं बार-बार सैन्य संघर्षों में शामिल रहा है और वैश्विक स्तर पर टैरिफ़ जैसे मुद्दों पर अन्य देशों से टकराव की नीति अपनाता रहा है, यदि वही देश “बोर्ड ऑफ़ पीस”का नेतृत्व करे, तो क्या उससे वास्तविक और टिकाऊ शांति की उम्मीद की जा सकती है। यही वह मूल प्रश्न है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भीतर व्यापक संदेह को जन्म दिया है। हालिया प्रामाणिक विश्लेषणों के समग्र आकलन से यह संकेत मिलता है कि इस आयोग के गठन के उद्देश्य, उसकी कार्यप्रणाली और संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर मतभेद और विवाद मौजूद हैं।
हाल के दिनों में विश्व और चीन के बीच संवाद लगातार गहराता जा रहा है। लगभग दस दिन पहले कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन की एक आधिकारिक यात्रा की और कई सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित 2026 की विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में “चीन के अवसर” पर व्यापक चर्चा हुई।
साल 2025 में चीन के वित्त मंत्रालय ने जो राजकोषीय नीति लागू की, उसके नतीजों को लेकर आश्वस्ति का ही बोध है कि इसे 2026 में भी जारी रखने का ऐलान किया गया है। यह ऐलान 20 जनवरी को स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चीन के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने किया है। इससे सकारात्मक नतीजों की उम्मीद अधिकारियों ने जताई है।
चीन में पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना की शुरूआत होने वाली है। इसके ठीक पहले आर्थिक मोर्चे पर चीन के बेहतर प्रदर्शन ने देश को नए उत्साह से भर दिया है। साल 2025 में चीन के सकल घरेलू उत्पाद दर यानी जीडीपी में पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की है।
2025 के अंत में, यूरोप और मध्य पूर्व के 100 से अधिक विदेशी खरीदारों ने चीन के यीवू शहर के लिए एक चार्टर विमान बुक किया।
चीन द्वारा 2025 के लिए 5.0% आर्थिक वृद्धि के पूर्वानुमान जारी किए जाने के बाद, विदेशी कंपनियों के सीईओ ने इसे "वास्तविक अवसर" बताते हुए इसकी प्रशंसा की। अंतर्राष्ट्रीय टिप्पणीकारों ने इसे "अपेक्षाओं से परे" और "अत्यधिक लचीला" बताया। इस आंकड़े के पीछे ठोस वृद्धि निहित है, जो चीनी अर्थव्यवस्था की स्थिर और लचीली प्रकृति का स्पष्ट प्रमाण है, और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बहुमूल्य निश्चितता का संचार करती है।
वर्ष 2026 वैश्विक कूटनीति और सांस्कृतिक विरासत के संगम का वर्ष है। सात दशक पहले, 1956 में मिस्र के साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर चीन ने अफ्रीकी महाद्वीप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
"चीन और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग का एक नया द्वार खुलने वाला है," "चीन और कनाडा एक नए प्रकार की रणनीतिक साझेदारी बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं जिससे दोनों देशों और दुनिया को लाभ होगा"... अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने 14 से 17 जनवरी तक कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चीन यात्रा की सकारात्मक समीक्षा की।
हाल ही में चीन ने कानून के तहत जापान को दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण को और कड़ा कर दिया है। इसके प्रत्युत्तर में जापान ने चीन पर "आर्थिक दबाव" डालने का आरोप लगाते हुए इस कदम का विरोध किया और इन उपायों को वापस लेने की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चीन इस प्रकार के आरोपों का "कड़ा विरोध करता है और उन्हें स्वीकार नहीं करेगा"। चीनी मंत्रालय ने जोर दिया कि चीन का यह कदम किसी भी तरह से "दबाव" नहीं, बल्कि जापान की बढ़ती खतरनाक गतिविधियों के मद्देनज़र उठाया गया एक वैध, उचित और आवश्यक कदम है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के चीन के दायित्व के अनुरूप है।