पेइचिंग में 26 से 29 अक्टूबर तक आयोजित चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की 20वीं केंद्रीय समिति का पाँचवाँ पूर्ण अधिवेशन महत्वपूर्ण है।
अक्तूबर 2026 को चीन के आधुनिकीकरण के सफर में एक ऐतिहासिक महीने के तौर पर याद किया जाएगा।
33वां यांगलिंग कृषि उच्च-तकनीकी मेला 25 अक्टूबर को शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) कृषि एक्सपो के साथ शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न देशों के कृषि विशेषज्ञ एक साथ आए। इस एक्सपो में न केवल नई कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, बल्कि विकासशील देशों के बीच व्यावहारिक संवाद के लिए एक मंच भी प्रदान किया गया। एससीओ के प्रमुख कृषि प्रधान देश भारत की जनसंख्या और खाद्य संरचना चीन के समान है और जलवायु परिवर्तन से भी समान रूप से प्रभावित है, जिससे कृषि अनुभव में आपसी सीख के भरपूर अवसर मिलते हैं। जटिल भू-राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर, कृषि सहयोग आपसी समझ को बढ़ाने के लिए एक प्रारंभिक बिंदु के रूप में कार्य कर सकता है।
व्यापार अंततः विश्वास पर टिका होता है। दक्षिण चीन के क्वांगतोंग प्रांत की राजधानी क्वांगचो में चल रहा 140वां कैंटन फेयर केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापारिक संबंधों को जमीन पर उतारने का अनूठा मंच है।
22 अक्टूबर को, चीनी श्रमिक एवं किसान लाल सेना के लॉन्ग मार्च की विजय की 90वीं वर्षगांठ मनाने के लिए चीन की राजधानी पेइचिंग में एक भव्य सभा आयोजित की गई।
"चीन अद्भुत है, मैं सभी को इसे देखने की पुरजोर सलाह देता हूँ।" एलन मस्क के इन शब्दों ने विदेशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चीन के बारे में जिज्ञासा की लहर पैदा कर दी।
"लाल सेना लांग मार्च की कठिनाइयों से नहीं डरती, हजारों पहाड़ और दस हजार नदियाँ उसके लिए कुछ भी नहीं हैं" — चीन के महान नेता माओ त्सेतुंग की सितंबर 1935 में लिखी यह पंक्ति आज, लांग मार्च की विजय की 90वीं वर्षगांठ पर भी, प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।
19 अक्तूबर को चीन की अर्थव्यवस्था की "तीन तिमाही रिपोर्ट" जारी हुई। पहली तीन तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद 1071 खरब युआन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.6 प्रतिशत बढ़ा। बीबीसी, रॉयटर्स जैसे विदेशी मीडिया ने कहा कि "चीन की तीसरी तिमाही की वृद्धि अपेक्षा से अधिक रही"। फाइनेंशियल टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाले से कहा कि नई गुणवत्ता उत्पादक शक्तियां, विशेष रूप से उन्नत विनिर्माण, चीनी अर्थव्यवस्था में अधिक से अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
17 और 19 अक्टूबर को जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सानाए ने यासुकुनी मंदिर में चढ़ावा और पूजा शुल्क अर्पित किया। कई मंत्रिमंडल के मंत्रियों और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेताओं ने भी वहां दर्शन किए। टोक्यो परीक्षण के 80वें वर्ष में जापानी राजनेताओं का लगातार "भूत-पूजन" युद्ध-अपराधियों को बरी करने, आक्रमण को पलटने और "पुनः सैन्यीकरण" का मार्ग प्रशस्त करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे को उजागर करता है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध और गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने भी जापान से इतिहास का सामना करने का आग्रह किया है।