चीन में 15वीं पंचवर्षीय योजना के पहले पांच महीनों के आर्थिक आंकड़े हाल ही में जारी किए गए हैं। उद्योग, उपभोग और विदेशी व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं और चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में चीन का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन न केवल उसकी आंतरिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। चीन की इस प्रगति को तीन प्रमुख शब्दों के माध्यम से समझा जा सकता है: स्थिरता, नवाचार और लचीलापन।
हर साल जून में, चीन युवाओं का एक अनूठा नज़ारा पेश करता है: माध्यमिक और उच्च विद्यालय के लिए राष्ट्रीय एकीकृत प्रवेश परीक्षाएं एक के बाद एक जल्दी समाप्त हो जाती हैं, और उच्च विद्यालय और विश्वविद्यालय एक साथ स्नातक समारोह की शुरुआत करते हैं।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) अपनी स्थापना की 105वीं वर्षगांठ मना रही है। पार्टी का यह सफर केवल एक राजनीतिक इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता से लेकर आधुनिकीकरण तक की एक अभूतपूर्व यात्रा है।
33वीं एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) आर्थिक नेताओं की बैठक 18 से 19 नवंबर 2026 तक चीन के क्वांग तुंग प्रांत के शनचन शहर में आयोजित होगी, जिसमें 21 एपेक सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे।
जून के महीने में, दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत की राजधानी खुनमिंग में स्थित त्येनछी झील चमचमाते पानी और जीवंत फूलों से जगमगा उठी है। यहाँ छह दिवसीय 10वां चीन-दक्षिण एशिया एक्सपो (सीएसएई) आयोजित हो रहा है।
21वीं सदी के वैश्विक इतिहास में यदि किसी एक विकासात्मक उपलब्धि ने पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों का ध्यान सबसे अधिक आकर्षित किया है, तो वह है चीन का व्यापक गरीबी उन्मूलन अभियान।
ये बात है चीन की उस अद्भुत यात्रा की जिसमें लाखों-करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया। चीन ने दुनिया को दिखाया कि अगर सही इरादा और पूरे देश की एकजुटता हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।
1949 में नए चीन की स्थापना के बाद से चीनी नेताओं की कई पीढ़ियों ने “पूरी लगन से लोगों की सेवा करने” के लिए अथक प्रयास किए हैं। यह आदर्श सीपीसी के शासन के हर कदम में झलकता है।
हाल के दिनों में भारत में नीट पेपर लीक और सीबीएसई बोर्ड में हुई गड़बड़ी के बीच चीन में भी एक बड़ी देशव्यापी परीक्षा का आयोजन हुआ है।हालांकि भारत के उलट चीनी कॉलेज एंट्रेस एग्जाम यानी ‘काओ खाओ’ 7-8 जून को सुरक्षा इंतजामों के साथ सफलता से संपन्न हुआ।