चीन लोक गणराज्य के संस्थापक और दिवंगत चीनी नेता माओ त्से-तुंग की एक प्रसिद्ध पंक्ति याद आती है: "जनता पानी की तरह है और सेना मछली की तरह"।
चीन लगातार पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दे रहा है, इसके साथ ही हरित विकास को बढ़ावा देने के लिए भी चीन काम कर रहा है। इससे पता चलता है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए वह अपनी भूमिका निभा रहा है।
चीन में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाता है। सरकार द्वारा समय-समय पर विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं। इसके कारण चीन में नौनिहालों का जीवन बहुत आरामदायक और अच्छा बीतता है।
जापान की बदलती सैन्य नीति ने पूरी एशिया को चिंतित कर दिया है। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्पित के बाद जापान ने कभी युद्ध ना करने का दुनिया से वादा किया था।
हाल ही कुछ पश्चिमी अर्थव्यवस्थाएं व्यापार-आर्थिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर "चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता" जैसे दावे प्रचारित कर व्यापार संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रही हैं। चीन ने पुख्ता आंकड़ों से इन निराधार आरोपों को खारिज किया है, उसकी औद्योगिक क्षमता उपयोग दर विश्व सामान्य स्तर 75-80% के करीब 74.4% है। चीन के नये उद्योग वैश्विक हरित परिवर्तन को गति दे रहे हैं और ये वास्तव में पूरी दुनिया के लिए "चीन अवसर 2.0" है।
चीन सहित विश्व के कई देश प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। अक्सर तूफान, भारी बारिश और बाढ़ की चुनौती खड़ी रहती है। जिसके कारण जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
आज रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई और नवोन्मेषी दवाएं चीन की "नई तीन चीज़ें" बनकर दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
इस वर्ष 7 जुलाई की ऐतिहासिक घटना (मार्को पोलो ब्रिज कांड) की 89वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, जब जापानी सैन्यवाद ने चीन के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया था।