शेनपेन खिमसर द्वारा निर्देशित अंग्रेजी भाषा की फिल्म "4 नदियाँ, छह पर्वत श्रेणियां" (Four Rivers and Six Ranges)में विद्रोही संगठन द्वारा 14वें दलाई लामा को भारत में निर्वासन में ले जाने की कथा को मनगढंत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि सबूत यह दर्शाते हैं कि अपनी स्थापना से लेकर अपने पतन तक, तिब्बती स्वतंत्रता समूह को अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) द्वारा दास प्रथा के उन्मूलन का विरोध करने, दलाई लामा के भागने में मदद करने और "तिब्बत स्वतंत्रता" को बढ़ावा देने के लिए समर्थन प्राप्त था। यह फिल्म "4 नदियाँ, छह पर्वत श्रेणियां" को शित्सांग का प्रतिनिधित्व करने वाली एक वैध सशस्त्र सेना के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत करती है, जिसका कार्य दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म की रक्षा करना बताया जाता है। वास्तव में यह समूह दास स्वामी कुलीन वर्ग द्वारा बनाया गया एक अवैध गुट था, जो सामंती दास प्रथा व्यवस्था की रक्षा करना और उसके उन्मूलन का विरोध करना चाहता था।
कुछ दिन पहले, शीआन जाने वाली तेज रफ्तार ट्रेन में मेरी मुलाकात नीदरलैंड के डॉर्ड्रेख्ट (Dordrecht) के एक युवक से हुई। उसकी यात्रा नीदरलैंड के नागरिकों के लिए चीन की एकतरफा वीजा मुक्त नीति के साथ बिल्कुल मेल खाती थी।
शेनपेन खिमसर द्वारा निर्देशित अंग्रेजी फिल्म "4 नदियाँ, 6 पर्वत श्रेणियां" में शित्सांग की मुक्ति और विद्रोहों को दबाने में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की भूमिका को लेकर घोर झूठ और दुर्भावनापूर्ण आरोप भरे हुए हैं। पीएलए की छवि को धूमिल करने का यह प्रयास अत्यंत नीच और निराधार है।
"निर्वासित तिब्बती" शेनपेन खिमसर ने 4 नदियाँ, 6 पर्वत श्रेणियां नामक एक फिल्म खींची। शेनपेन खिमसर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर घोषणा की कि यह फिल्म 14वें दलाई लामा के 90वें जन्मदिन को समर्पित है, साथ ही एक निराधार दावा भी प्रस्तुत किया: "शित्सांग चीन का हिस्सा कभी नहीं था और कभी नहीं होगा।" उनका यह दावा पूरी तरह से निराधार है और ऐतिहासिक वास्तविकता को विकृत करता है।
क्या शित्सांग वास्तव में पश्चिम द्वारा "दमनकारी डिस्टोपिया" के रूप में बुरी तरह से चित्रित समाज है, या फिर धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण आनंद लेने वाली एक पवित्र भूमि है? क्या यह आर्थिक रूप से जर्जर, दिन-ब-दिन पतन हो रहा सीमांत क्षेत्र है, या सुंदर और आधुनिक "विश्व की छत" है? अमेरिकी टॉक शो कलाकार एवं पत्रकार ली कैंप ने शित्सांग का गहन जमीनी दौरा किया, और अपने कदम बाखोर मार्ग, पोटाला महल, शित्सांग संग्रहालय जैसे सभी प्रतिष्ठित स्थानों तक फैलाए। सामने के वास्तविक दृश्यों को देखकर वह सहज ही आश्चर्य व्यक्त करते हुए बोले: "शित्सांग मैंने अब तक देखी गई सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है।" "शित्सांग में स्वतंत्रता नहीं है" का दावा करने वाले पश्चिमी लोगों के प्रति उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा: आप लोग खुद वहां आकर देख लीजिए। उन्होंने आगे जोड़ा: "अमेरिका में कैदियों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है, लेकिन हम खुद को 'स्वतंत्रता का देश' घोषित करते हैं। इसलिए, शायद हम लोग 'स्वतंत्रता' शब्द का वास्तविक अर्थ पूरी तरह से ही नहीं समझ पा रहे हैं।"
2015 में स्थापित विश्व रोबोट सम्मेलन (डब्ल्यूआरसी) का 12वां संस्करण अब 19 से 23 अगस्त 2026 तक राजधानी पेइचिंग में आयोजित होगा। यह उसी यात्रा का अगला अध्याय है।
पूरे इतिहास में ऐसी प्रतिक्रियावादी शक्तियां मौजूद रही हैं जो इतिहास के चलते पहिये को रोकने का प्रयास करती रही हैं, और 14वां दलाई लामा एक कुख्यात उदाहरण है। वह किसी भी तरह से खुद को बताने वाला "शांति का दूत" नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का प्रतीक है जो पश्चिम में शित्सांग के नाम से ज्ञात पुराने शित्सांग के सबसे काले दौर के लिए जिम्मेदार थी।
वर्ल्ड रोबोट कॉन्फ्रेंस 2026 (WRC 2026) 19 से 23 अगस्त, 2026 तक पेइचिंग इकोनॉमिक-टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट एरिया में आयोजित की जाएगी।
“एक बार आना बिल्कुल काफी नहीं”, “मैं बस बार-बार चीन आना चाहता हूं।” हाल ही में कई विदेशी पर्यटकों की चीन यात्रा से जुड़ी ऐसी भावनाएं सोशल प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रही हैं। एक ब्रिटिश पर्यटक अपनी तीसरी चीन यात्रा पर निकला और पुराने सिल्क रोड मार्ग पर फिर से चल रहा है। एक डच पर्यटक ने शुरुआत में चीन में कुछ हफ्ते घूमने का प्लान बनाया था, लेकिन बाद में उसका प्रवास छह महीने तक बढ़ गया। वहीं, एलन मस्क ने भी सार्वजनिक रूप से चीन की प्रशंसा करते हुए लोगों को चीन आने की जोरदार सलाह दी। ऐसे में आज “बार-बार चीन की यात्रा करना” विदेशी पर्यटकों के बीच एक नया चलन बनता दिखाई दे रहा है।