भारत और चीन, दो पड़ोसी देश, इतिहास के लगभग एक ही मोड़ पर खड़े हुए। भारत ने 79 वर्ष पहले, 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह लगभग 200 वर्षों की गुलामी के अंत का प्रतीक था।
हाल ही में, “तिब्बती स्वतंत्रता” समर्थक ताकतों ने 2 जुलाई को तिब्बती लोग लोका रांगचेंग द्वारा आत्मदाह की घटना का फायदा उठाकर एक तथाकथित "वैश्विक अभियान" शुरू करने, झूठी जनमत गढ़ने, अलगाववादी भावनाओं को भड़काने और चीन को बदनाम करने और विभाजित करने का प्रयास किया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में चीन एक नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है।
इस वर्ष 15 अगस्त को जापान के बिना शर्त आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ है। ठीक उस दिन, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने यासुकुनी मंदिर में एक रस्म के तौर पर बलि शुल्क अदा किया, जिसमें 14 श्रेणी-ए के युद्ध अपराधियों को विराजमान किया गया है।
दुनिया में रोबोटिक्स और मशीन टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी दिशा में चीन की राजधानी पेइचिंग में 2026 वर्ल्ड रोबोट कॉन्फ्रेंस का आयोजन होने जा रहा है।
15 अगस्त को राष्ट्रीय पारिस्थितिकी दिवस है, जो चीन की पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण खिड़की है और यह दुनिया को चीन की वैश्विक पर्यावरणीय शासन में भागीदारी और मानव व प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के प्रयासों को समझने के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।
कभी गर्मियों में एशिया के देशों को सैलानियों की पहली पसंद यूरोप के पर्यटन स्थल होते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। कम से कम इस साल तो यह बदलाव बड़े रूप में दिख रहा है। इसकी वजह है यूरोप में इस साल पड़ी प्रचंड गर्मी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यूरोप में वैसे भी गर्मी अपनी तासीर बदल रही है।
इस गर्मी में दक्षिणी चीन के शहर शनचन के लोगों के मोमेंट्स (वीचैट सोशल फीड) का मिजाज बदल गया है। न तो तूफान की चेतावनी, न ही अत्यधिक गर्मी का लाल अलर्ट – बल्कि इन दिनों शहर की गलियों और चौराहों पर एक नई 'आबादी' उभर कर आई है – ह्यूमनॉइड रोबोट सचमुच 'ड्यूटी' पर आ गए हैं।
दुनिया के बाजारों में "मेड इन चाइना" का लेबल एक बार फिर बदल रहा है। अब ये सिर्फ सस्ता नहीं है। अब ये "नई तीन चीज़ें" हैं।