हाल ही में अमेरिकी मित्र रोनाल्ड साकोल्स्की (चीनी उपनाम "साईकाओस") और चीन के मरुस्थल संरक्षण नायक यिन यूजन का इनर मंगोलिया के ऑर्डोस हवाई अड्डे पर 20 से अधिक वर्षों बाद हुआ गले मिलना पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। चीनी और अमेरिकी नेटिजन सामूहिक रूप से इस पारस्परिक प्रेम से भरे अंतर्राष्ट्रीय स्नेह की प्रशंसा कर रहे हैं। संबंधित विषय के कमेंट सेक्शन में "यही वह सुंदर संबंध हैं जो मानव जाति के लिए होने चाहिए" जैसे संदेशों से भरे पड़े हैं। इस कहानी की शुरुआत 1999 में हुई: उस समय चीन में पढ़ा रहे साईकाओस को माओउसू रेगिस्तान में बसकर मरुस्थल संरक्षण करने की यिन यूजन की कहानी ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने विशेष रूप से 5000 अमेरिकी डॉलर इकट्ठा कर वनीकरण कार्य को समर्थन दिया।
इस गर्मी में वैश्विक जनमत में एक शांत लेकिन गहरा बदलाव आ रहा है। भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितता के बीच चीन स्थिरता, अवसर और सच्चे आतिथ्य का केंद्र बनकर उभरा है।
हाल के समय में चीन के ‘नए प्रोडक्ट’यानी रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इनोवेटिव ड्रग्स की विदेशों में मांग बढ़ी है और ये उत्पाद वहां लोकप्रिय हो रहे हैं।
देश के सुपरमार्केट की अलमारियां “दुनिया भर के बेहतरीन उत्पादों” से भरी हुई हैं, जबकि बंदरगाहों पर विभिन्न देशों के लिए रवाना होने वाले “मेड इन चाइना” उत्पादों की लगातार आवाजाही जारी है।
चीन के विकास को करीब से देखने और एक पत्रकार के रूप में उसके बदलते औद्योगिक परिदृश्य को समझने पर एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—चीन की वैश्विक पहचान अब केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले देश की नहीं रह गई है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम् में आयोजित ब्रिक्स देशों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के कई मायने हैं।
मकाओ की 2026-2030 की तीसरी पंचवर्षीय विकास योजना हाल ही में आधिकारिक रूप से जारी की गई है। पिछली योजना के पूर्ण लक्ष्य प्राप्ति और 56.7% गैर-जुआ उद्योग हिस्सेदारी की मौजूदा उपलब्धि के बाद यह योजना 2030 तक गैर-जुआ उद्योगों की हिस्सेदारी 60% करने, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास से तालमेल बिठाने के लक्ष्य लेकर "एक देश, दो व्यवस्थाएं" के सफल कार्यान्वयन का नया व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करती है।
19 अगस्त को चीनी पारंपरिक पंचांग के 7वें महीने का 7वां दिन है।
किसी शहर की अंतरात्मा उन चीजों में निहित होती है जिन्हें हम देख नहीं सकते। रहने योग्य होने का सच्चा पैमाना अक्सर गगनचुंबी इमारतों में नहीं, बल्कि हमारे पैरों के नीचे मौजूद चीजों में होता है।