“भारत और चीन - दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय 'साझेदार' और खतरे के बजाय 'अवसर' के रूप में देखना चाहिए,” यह भारत-चीन संबंधों पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी द्वारा देश के 2026 “दो सत्रों” के मौके पर 8 मार्च को राजधानी पेइचिंग में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दिया गया मुख्य संदेश था।
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल ही में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के 14वें सत्र के चौथे पूर्णाधिवेशन में प्रस्तुत सरकारी कार्य-रिपोर्ट में मज़बूत घरेलू बाज़ार के निर्माण पर विशेष ज़ोर दिया। वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय सरकार के प्रमुख कार्यों में इस लक्ष्य को पहले स्थान पर रखा गया है। इस विषय को जो महत्व दिया गया है, वह अभूतपूर्व माना जा रहा है और इसने देश-विदेश में व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।
चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने हाल ही में 2025 के राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास पर अपनी आधिकारिक रिपोर्ट जारी की है।
साल 2026 में वैश्विक अनिश्चितता और भी गहरी हो गई है। लगातार बढ़ते संघर्षों और अस्थिरता ने युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। विश्व आर्थिक मंच और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन जैसी प्रमुख बैठकों में दी गई चेतावनियों ने भविष्य को लेकर वैश्विक चिंताओं को और तीव्र कर दिया है। ऐसे समय में, चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस संवाद के माध्यम से यह संकेत स्पष्ट रूप से सामने आया कि उथल-पुथल भरी वैश्विक परिस्थितियों के बीच चीन स्वयं को स्थिरता और निश्चितता प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
चीन में, ड्रोन को अक्सर "डिलीवरी ड्रोन", "कृषि ड्रोन", "बचाव ड्रोन" आदि से जोड़कर देखा जाता है, न कि "हमलावर ड्रोन" से। इसके पीछे एक गहरा सांस्कृतिक चुनाव है: तकनीक का उपयोग जीवन को सशक्त बनाने के लिए, न कि उसे समाप्त करने के लिए।
31 दिसंबर, 2025 को अपना 2026 नव वर्ष संबोधन देते हुए, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने आर्थिक विकास में देश के आत्मविश्वास और वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को आवाज दी है।
चीन में 2026 में आयोजित एनपीसी और सीपीपीसीसी के दो सत्रों में 4.5%-5% का जीडीपी विकास लक्ष्य निर्धारित किया गया। यह न केवल 15वीं पंचवर्षीय योजना(2026-2030) की दिशा तय करता है, बल्कि विश्व को उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए चीन के दृढ़ संकल्प और इससे जुड़े वैश्विक अवसरों से भी अवगत कराता है। अंतर्राष्ट्रीय लोकमत यह है कि यह चीन की विकास रणनीति के "संख्या-प्रधान" से "गुणवत्ता-प्रधान" की ओर एक गहन परिवर्तन का संकेत है।
पारंपरिक वसंत महोत्सव के बाद, चीन ने इस साल की वार्षिक बैठकों के जोड़े में प्रवेश किया है, जो चीन की शीर्ष विधायी संस्था 14वीं राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (NPC) के चौथे सत्र और शीर्ष राजनीतिक सलाहकार निकाय, चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) की 14वीं राष्ट्रीय समिति के चौथे सत्र को संदर्भित करता है, जो क्रमशः 5 और 4 मार्च से शुरू होते हैं।
विश्व व्यवस्था के संचालन के दो मार्ग इतिहास में हमेशा विद्यमान रहे हैं। एक मार्ग सद्गुण, नैतिकता और सामंजस्य पर आधारित है, जो लोगों के हृदयों को जोड़कर स्थिरता स्थापित करने का प्रयास करता है। दूसरा मार्ग शक्ति और बल प्रयोग पर आधारित है, जो व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैन्य सामर्थ्य को प्रमुख साधन मानता है।