चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य, चीनी बौद्ध धर्म संघ के उपाध्यक्ष और चीनी बौद्ध धर्म की शीत्सांग शाखा के अध्यक्ष पंचेन कोइगी ग्याइबो ने 11 से 21 अक्तूबर तक नगारी क्षेत्र में सामाजिक सर्वेक्षण और बौद्ध गतिविधियों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के नागछू शहर के बाछेन जिले में 22 अक्तूबर की रात 10 बजकर 33 मिनट पर 7.0 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 24 अक्तूबर की शाम 5 बजे तक इस भूकंप में 16 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 76 लोग घायल हुए थे। घायलों में 11 की हालत गंभीर है, जबकि 65 लोगों को हल्की चोटें आई हैं। अब तक 12,489 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
24 अक्तूबर को रात 8:38 बजे, अंतिम निम्न-वोल्टेज ट्रांसफार्मर क्षेत्र में बिजली की बहाली के साथ, शीत्सांग के 7.0 तीव्रता के भूकंप प्रभावित नागछु शहर के बाछेन जिले में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह से बहाल हो गई।
हाल ही में, शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के शान्नान शहर में ल्हासा उत्तर-दक्षिण पर्वतीय हरियाली परियोजना के शान्नान खंड के विभिन्न क्षेत्रों में, कर्मचारियों ने वन और घास के मैदानों में आग से बचाव के लिए गश्त की, जंगल के नीचे ज्वलनशील पदार्थों को साफ़ किया।
दक्षिण पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के आली प्रीफ़ेक्चर में स्थित मानसरोवर झील छिंगहाई-शीत्सांग पठार पर आसमान के प्रतिबिंब वाले विशाल दर्पण जैसी फैली है। दूर बर्फ से ढकी चोटियाँ और नीचे शांत, नीलम जैसा पानी – यहाँ धरती, बर्फ और जल मिलकर एक विशाल, शांत और सुंदर दृश्य बनाते हैं। किनारे पर खड़े होकर प्रकृति की इस भव्यता के सामने खुद को छोटा महसूस करना स्वाभाविक है।
10 अक्तूबर को दूसरा नमचा बरवा फोरम और शीत्सांग में राष्ट्रीय पारिस्थितिक सभ्यता उच्चभूमि निर्माण मंच शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के न्यिंगची शहर में आयोजित हुआ।
शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के आली क्षेत्र की पहली पवन ऊर्जा परियोजना ने एक बड़ा कदम पूरा कर लिया है। चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर (सीजीएन) की आली गेत्से 50 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना में हाल ही में सभी पवन टर्बाइनों की स्थापना पूरी हो गई है और अब यह पूरी तरह ग्रिड से जोड़ने तथा परीक्षण के चरण में प्रवेश कर चुकी है। योजना के मुताबिक, इस परियोजना को 2026 के अंत तक ग्रिड से जोड़कर संचालन में लाया जाएगा।
बीस साल पहले, गर्मियों के मौसम में छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे ने अभी-अभी यातायात शुरू किया था। इस रेलवे के जरिए चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश पहुंचने वाले पहले खेप के पत्रकारों में से एक होने के नाते, मैंने आखिरकार उस धरती पर कदम रखा, जिसके बारे में लंबे समय से सुनती और जानने की इच्छा रखती थी।
दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में स्थित नामत्सो झील, जिसे शीत्सांग में 'स्वर्ग का सरोवर' कहा जाता है, समुद्र तल से 4,718 मीटर की ऊँचाई पर बसी है। यह दुनिया की सबसे ऊँची बड़ी खारे पानी की झील है, जो 2,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है। न्येनचेनतांगल्हा पर्वत से आने वाले ग्लेशियर और झरनों से पोषित यह झील वन्यजीवों का घर भी है – भूरे भालू, जंगली याक, कियांग और पानी के पक्षियों के झुंड यहाँ के किनारों पर देखे जा सकते हैं। इसके पानी में कई प्रकार की मछलियाँ हैं, और आसपास की पहाड़ियों में कॉर्डिसेप्स और स्नो लोटस उगते हैं। यह झील ल्हासा के दामशुंग काउंटी और नागछ्यू के बैंगोइन काउंटी में फैली है और शीत्सांग की तीन पवित्र झीलों में से एक है। यहाँ का नज़ारा हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है।
चाइना रेलवे छिंगहाई-शीत्सांग समूह से मिली जानकारी के अनुसार, छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे के पूरी तरह चालू होने के 20 वर्षों में अब तक 10 करोड़ 40 लाख से अधिक यात्रियों ने इस रेलवे से यात्रा की है, जबकि 82 करोड़ 40 लाख टन से अधिक माल का परिवहन किया गया है। इस दौरान यह रेलवे छिंगहाई प्रांत और शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के बीच लोगों की आवाजाही, माल परिवहन और औद्योगिक विकास की प्रमुख जीवनरेखा बन गई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने सोमवार को चीन की राजधानी पेइचिंग में आयोजित नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन ने शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के शिकाज़े शहर के चीलोंग जिले में हुई मडस्लाइड आपदा में लापता विदेशी नागरिकों के परिवारों के लिए डीएनए जानकारी संग्रह की प्रक्रिया के बारे में चीन में संबंधित देशों के दूतावासों को जानकारी दे दी है।
चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के नगारी क्षेत्र की गार काउंटी के जियामू गांव के 40 वर्षीय त्सेरिंग ग्याबुक की कड़ी मेहनत और बुद्धिमत्ता ने उन्हें एक पारंपरिक चरवाहे से अमीर और एक अहम स्थानीय नेता बनने में मदद की।