दक्षिण-पश्चिम चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में स्थित याम्द्रोक झील पठार पर बिखरे हुए एक नीले नीलम जैसी दिखती है। तीन पवित्र झीलों में से एक, यह अपने क्रिस्टल-सा साफ़ पानी, घुमावदार किनारों और इसे घेरे हुए बर्फ़ीले पहाड़ों के साथ हर कोण से आत्मा को मोह लेती है। नीले आसमान के नीचे, यह झील सचमुच किसी सपने जैसी लगती है। यदि आप शांति, प्रकृति और मनमोहक सुंदरता की तलाश में हैं, तो याम्द्रोक झील आपका इंतज़ार कर रही है।
विगत पचहत्तर वर्षों में चीन सरकार ने शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के विकास में भारी खर्च किया है।
बचपन में, जब मैं प्राइमरी स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ता था, तब एक दिन मैंने अपनी इतिहास की किताब में चीनी धर्माचार्य ह्वेनसांग और उनके तीन शिष्यों की भारत यात्रा की कहानी पढ़ी थी।
शीत्सांग (तिब्बत) की शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 23 मई की शाम शीत्सांग ग्रैंड थिएटर में चीन के पहले टैप डांस नाटक “चाशी श्याचुओ” का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया।
जब समय की अनंत धारा करवट लेती है, तो इतिहास के पन्नों पर कुछ ऐसी इबारतें अंकित की जाती हैं जो आने वाली कई सदियों का भाग्य और वैश्विक सभ्यताओं की दिशा निर्धारित करती हैं।
2026 में शीत्सांग की शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर ल्हासा में 23 मई को " शीत्सांग की 75 वर्षों की शांतिपूर्ण मुक्ति की विकास उपलब्धियां और सबक " विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संगोष्ठी आयोजित की गई।
चीन के दक्षिण पश्चिम में स्थित विश्व की छत और धरती का तीसरा ध्रुव कहे जाने वाले शीत्सांग का नाम सुनकर ही रोमांच पैदा होता है।
चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश की सुबह का वह दृश्य आज भी मेरी आंखों में बसा है।
23 मई, 2026 को शीत्सांग अपनी शांतिपूर्ण मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा।
शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश में पर्यटन सेवाओं में लगातार सुधार के साथ-साथ, राजधानी ल्हासा का पर्यटन आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। पाखुओ सड़क, ल्हासा के पुराने शहर का केंद्र है, जिसका इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना है।
18 मई को, द्वितीय "बर्फीले पठार पर प्राचीन शहर, पवित्र भूमि ल्हासा" सांस्कृतिक पर्यटन महोत्सव के अंतर्गत "दामक्सुंग मिलन समारोह" का आयोजन शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा स्थित दामक्सुंग काउंटी के रेसकोर्स में किया गया।
17 मई को, ल्हासा की संस्कृति और पर्यटन तत्वों से सजे एक विशेष विमान ने ल्हासा गोंगगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर लैंडिंग की। उसी दिन इस हवाई अड्डे पर "बर्फीले पठार पर प्राचीन शहर, पवित्र भूमि ल्हासा" थीम वाले विमान का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जो इस थीम के विमान की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक था।