चीन के शानतोंग प्रांत के छ्वीफू में चीन के महान विचारक और दार्शनिक कंफ्यूशियस की विशाल मूर्ति बनायी गयी है। यह मूर्ति 72 मीटर है, जो दुनिया में कंफ्यूशियस की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसकी ऊंचाई उनके 72 शिष्यों के सम्मान में इतनी रखी गयी है। इस जगह पर दुनिया भर से लोग पहुंचते हैं, पूरा इलाका उनके विचारों और कहानियों से प्रभावित है।
क्या आपको भी लगता है कि चाइना दुनिया के बाज़ारों पर सिर्फ इसलिए कब्ज़ा कर रहा है क्योंकि वहां सामान सस्ते में बनता है? अगर हाँ, तो शायद आप एक बहुत बड़ी सच्चाई से अनजान हैं। आजकल पश्चिमी देशों में एक नया शब्द गूंज रहा है—"चाइना शॉक 2.0"। दावा यह है कि चाइना की सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बैटरियां और सोलर पैनल दुनिया भर की नौकरियों और उद्योगों को खा रहे हैं। लेकिन क्या वाकई कहानी सिर्फ इतनी ही है, या इसके पीछे कोई और वजह है? चलिए, आज की न्यूज़ स्टोरी में इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं….
आइए हम तुर्की के सिनोलॉजिस्ट गिरे फिदान के साथ आधुनिक चीन के विकास की धड़कन को महसूस करें।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय में संचालन मामलों के सहायक उच्चायुक्त रऊफ़ मज़ू ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव बुद्धि की उपज होने के नाते, मानवीय क्षेत्रों में लागू की जानी चाहिए, उदाहरण के लिए युद्ध-प्रभावित समूहों की सहायता के लिए।
चीन तटरक्षक बल का एक पोत 2026 के अपने पहले गश्ती अभियान पर त्याओयु द्वीप के लिए रवाना हुआ। यह यात्रा पूर्वी चीन सागर के सबसे सतर्क जलक्षेत्रों में से एक में नियमित अभियानों की एक दुर्लभ झलक पेश करती है।
क्या आपने कभी कोई ऐसी झील देखी है, जो इतनी विशाल हो कि समंदर जैसी लगे? एक ऐसी जगह, जहाँ आसमान का नीला रंग और ज़मीन की खूबसूरती आपस में गले मिलते हों? अगर नहीं, तो आज हम आपको ले चलते हैं चीन की एक ऐसी ही छिपी हुई खूबसूरत जगह की सैर पर, जिसका नाम है छिंगहाई झील। लगभग 4,500 वर्ग किलोमीटर से भी ज़्यादा में फैली यह झील न सिर्फ़ चीन की सबसे बड़ी झील है, बल्कि देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील भी मानी जाती है। यह समुद्र तल से करीब 3,200 मीटर की ऊंचाई पर, तिब्बती पठार की गोद में बसी हुई है। यानी यह सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि ऊंचाइयों में छिपी एक पूरी प्राकृतिक दुनिया है।
चीन को समझना है, तो शुरुआत उसके कीवर्ड्स से कीजिए। आज हम बात करेंगे एक बिल्कुल नए शब्द की—脑机接口(Brain Computer Interface,BCI) की!
अगर कोई आपसे पूछे कि तिब्बती पठार की यात्रा कहां से शुरू होती है, तो जवाब होगा, शीनिंग। चीन के छिंगहाई प्रांत की राजधानी शीनिंग (XINING) को यूं ही "Gateway to Tibetan Plateau" यानी तिब्बती पठार का प्रवेश द्वार नहीं कहा जाता। सदियों से यह शहर लोगों, संस्कृतियों और व्यापारिक रास्तों को जोड़ता आया है। आज भी चीन के भीतरी इलाकों को शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश से जोड़ने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण परिवहन और पर्यटन केंद्र है। पूरी कहानी जानिए इस वीडियो में...
14 से 16 जुलाई तक दक्षिण-पश्चिमी चीन के युन्नान प्रांत के शीश्वांगपान्ना ताई जातीय स्वायत्त प्रिफ़ेक्चर में "2026 विश्व महापौर संवाद-शीश्वांगपान्ना" कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
क्या ह्यूमनॉइड रोबोट चाय बना सकते हैं? चीन के फ़ुच्येन प्रांत के फ़ूडिंग शहर में इसका जवाब अब हकीकत बन चुका है।
चीन के पश्चिमी हिस्से में बनी छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को दुनिया इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार मानती है। ऊंचे पहाड़ों, जमी हुई जमीन और बर्फीले इलाकों से होकर गुजरने वाली यह रेलवे सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का साधन नहीं है। इसने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है। इस रेलवे ने दूर-दराज के गांवों को शहरों से जोड़ा, कारोबार को बढ़ावा दिया और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए मौके पैदा किए। इसके अलावा, रेलवे के आसपास करीब 10 औद्योगिक पार्क भी बनाए गए हैं, जिससे पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली है। पूरी कहानी जानिए इस वीडियो में….