26 अगस्त को लगभग सुबह साढ़े दस बजे नेपाल में जबरदस्त प्राकृतिक आपदा ने कहर मचाया।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक
क्या आपने कभी सोचा है कि चीन की महान सभ्यता, उसकी प्राचीन किताबें और क्लासिक्स आज के आधुनिक चीन को कैसे आकार देते हैं?
26 अगस्त की सुबह करीब 10:30 बजे नेपाल की ओर से आए भूस्खलन ने शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के शिकाज़े शहर के चीलोंग जिले में स्थित चीलोंग बंदरगाह में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इस आपदा में कई लोगों की जान गई और कई लोग लापता हो गए। आखिर यह भूस्खलन कैसे हुआ और इसकी ताकत इतनी ज्यादा क्यों थी? आइए, चाइना मीडिया ग्रुप द्वारा तैयार किए गए विशेष एनिमेशन के जरिए समझते हैं इस पूरी आपदा की प्रक्रिया।
भारत के दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका (नई दिल्ली) के छात्र और शिक्षक BRICS शैक्षिक दौरे के तहत चीन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने चीन की आधुनिक तकनीक, ऐतिहासिक धरोहरों और रोजमर्रा की जीवनशैली को करीब से देखा। छात्रों और शिक्षकों ने ग्रेट वॉल और फॉरबिडन सिटी जैसी ऐतिहासिक जगहों का दौरा किया और चीन के तेजी से हो रहे आधुनिक विकास को भी करीब से समझा। हालांकि, इस यात्रा के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया चीनियों का अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति लगाव और आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन।
युन्नान की पहाड़ियों के बीच जियांग यायु ने शहर की चमक-दमक छोड़कर गांव और खेती को अपना भविष्य चुना।
क्या आपने कभी बकरी सौंदर्य प्रतियोगिता के बारे में सुना है? चीन के शीत्सांग(तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के आली प्रिफेक्चर की कोकेन काउंटी के बैंगनी वेलवेट बकरी अपने प्राकृतिक और प्रदूषण मुक्त, चिकने और उच्च लचीलेपन वाले फर के लिए प्रसिद्ध है। उनके द्वारा उत्पादित फर को 'सॉफ्ट गोल्ड' के रूप में जाना जाता है और यह कपड़ा उद्योग के लिए उच्च श्रेणी का कच्चा माल है। हाल के वर्षों में, कोकेन काउंटी ने "प्रजनन मेढ़ा" सौंदर्य प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों का आयोजन करके बैंगनी वेलवेट बकरियों को पालने में चरवाहों के उत्साह को बढ़ाया है।
हाल ही में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका के बच्चों और टीचर्स की एक टीम ब्रिक्स (BRICS) देशों के एजुकेशन और कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चीन आयी थी। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने चीन की नई टेक्नोलॉजी, मशहूर ऐतिहासिक जगहों और चीनी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा और समझा। इस खास यात्रा के अनुभवों और उद्देश्यों को जानने के लिए हमने स्कूल की टीचर हेमा कपूर से बात की। आइए देखते हैं यह खास बातचीत।
इस प्राचीन और रहस्यमय भूमि में एक ऐसी जनजाति है जो हजारों वर्षों से चली आ रही है। उनकी कहानियाँ भी इस भूमि की तरह ही रंगीन हैं। यह सेनगुओ जनजाति का जन्मस्थान है, जो #शीत्सांग(#तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के आली प्रिफेक्चर के गेर्ट्से काउंटी में ममी टाउनशिप और वुमा टाउनशिप में स्थित है। सेनगुओ जनजाति अपने अनोखे महिलाओं के कपड़े - सेनगुओ पहनावा के लिए प्रसिद्ध है।
खूबसूरत पैंगोंग झील के किनारे जीवन का चमत्कार चुपचाप खिलता है।पैंगोंग विलो, पैंगोंग झील के किनारे पलने और बढ़ने के कारण यह नाम मिला है। हालाँकि इसे "विलो" कहा जाता है, यह वास्तव में शीत्सांग का एक अनोखा छोटा पौधा है।
आयुर्वेद और हेल्दी एजिंग का रिश्ता बड़ा गहरा है। आयुर्वेद के जरिए उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। चीन की राजधानी पेइचिंग में हेल्दी एजिंग थ्रू आयुर्वेद विषय पर जाने-माने आयुवेर्दिक चिकित्सक डा. धनवंतरी झा ने एक लेक्चर दिया।