ऑर्डोस में चल रहा है दुनिया का इकलौता 10 लाख टन क्षमता का कोयला-से-तेल संयंत्र

10:06:17 2026-07-28
उत्तरी चीन के इनर मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के ऑर्डोस शहर में दुनिया का एकमात्र ऐसा कोयला-से-तेल संयंत्र चल रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख टन है। नीले आसमान के नीचे चलने वाला यह संयंत्र कोयले को स्वच्छ ईंधन में बदलता है, जिससे तेल का आयात कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति भी सुरक्षित रहती है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां शून्य-अपशिष्ट तरीके से काम होता है। यहां इस्तेमाल किए गए पानी की एक-एक बूंद रिसाइकल की जाती है, और कार्बन कैप्चर तकनीक की मदद से उत्सर्जन को भी कम रखा जाता है। इस संयंत्र को हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
उत्तरी चीन के इनर मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के ऑर्डोस शहर में दुनिया का एकमात्र ऐसा कोयला-से-तेल संयंत्र चल रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख टन है। नीले आसमान के नीचे चलने वाला यह संयंत्र कोयले को स्वच्छ ईंधन में बदलता है, जिससे तेल का आयात कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति भी सुरक्षित रहती है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां शून्य-अपशिष्ट तरीके से काम होता है। यहां इस्तेमाल किए गए पानी की एक-एक बूंद रिसाइकल की जाती है, और कार्बन कैप्चर तकनीक की मदद से उत्सर्जन को भी कम रखा जाता है। इस संयंत्र को हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
उत्तरी चीन के इनर मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के ऑर्डोस शहर में दुनिया का एकमात्र ऐसा कोयला-से-तेल संयंत्र चल रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख टन है। नीले आसमान के नीचे चलने वाला यह संयंत्र कोयले को स्वच्छ ईंधन में बदलता है, जिससे तेल का आयात कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति भी सुरक्षित रहती है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां शून्य-अपशिष्ट तरीके से काम होता है। यहां इस्तेमाल किए गए पानी की एक-एक बूंद रिसाइकल की जाती है, और कार्बन कैप्चर तकनीक की मदद से उत्सर्जन को भी कम रखा जाता है। इस संयंत्र को हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
उत्तरी चीन के इनर मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश के ऑर्डोस शहर में दुनिया का एकमात्र ऐसा कोयला-से-तेल संयंत्र चल रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख टन है। नीले आसमान के नीचे चलने वाला यह संयंत्र कोयले को स्वच्छ ईंधन में बदलता है, जिससे तेल का आयात कम होता है और ऊर्जा आपूर्ति भी सुरक्षित रहती है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां शून्य-अपशिष्ट तरीके से काम होता है। यहां इस्तेमाल किए गए पानी की एक-एक बूंद रिसाइकल की जाती है, और कार्बन कैप्चर तकनीक की मदद से उत्सर्जन को भी कम रखा जाता है। इस संयंत्र को हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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