चीन के सिछुआन के देगे में तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन आरंभ

10:19:26 2026-08-26
25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
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25 अगस्त 2026 को चीन के सिछुआन प्रांत के गान्जी तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर के देगे काउंटी में "मेरी घास के मैदान से वादा" थीम पर आधारित तीसरा "लिंग • राजा गेसर" संगीत सीजन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में पशुपालक क्षेत्र के पारंपरिक परिधानों की विशेष परेड ने देगे की लोक संस्कृति और खम्बा सांस्कृतिक विशेषताओं को पूरी तरह से प्रदर्शित किया। "लिंग के सुरों से खम्बा जगमग" थीम पर आयोजित जन कला महोत्सव में स्थानीय कला दलों के साथ ही गान्जी, बाईयू, सेदा, शिक्यू जैसे क्षेत्रों के कलाकारों ने मंच साझा किया। गेसर कथा के मौखिक गायन, मुखौटा तिब्बती नाटक जैसे गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के कार्यक्रम पेश किए गए, जहां प्राचीन गेसर संस्कृति को आधुनिक कला संयोजन के साथ जोड़कर दर्शकों के लिए घास के मैदान का अनोखा सांस्कृतिक उत्सव तैयार किया गया।
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