भारत सरकार ने वर्ष 2025 को आर्थिक सुधारों के आधार स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति में एक दूरगामी बदलाव किया है।
जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति भारत में किसी कंपनी, फैक्ट्री, बिजनेस या प्रोजेक्ट में सीधे पैसा लगाता है, तो उसे FDI कहते हैं। अब भारत सरकार ने चीन से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें चीनी निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो। इसी मुद्दे को समझने के लिए आज हम दिल्ली यूनिवर्सिटी के देशबंधु कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह से बात करेंगे। वे ग्लोबल पॉलिटिक्स पढ़ाते हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अच्छी पकड़ रखते हैं।
आज का अंतरिक्ष अब किसी एक देश या सरकार की सीमा में बंद नहीं रहा। पहले जब हम space की बात करते थे, तो दिमाग में सिर्फ सरकारी एजेंसियों की तस्वीर आती थी— बड़े-बड़े रॉकेट, भारी-भरकम बजट और लंबी तैयारी। लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। अब private कंपनियाँ भी इस मैदान में उतर आई हैं, और तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सच कहें तो अंतरिक्ष अब एक नया “Global Market” बन चुका है। इसी बदलती तस्वीर में एक नाम तेजी से उभरा है— ChangGuang Satellite Technology (CGST)। यह चाइनीज़ कंपनी पहले एक रिसर्च संस्थान का हिस्सा थी, लेकिन समय के साथ इसने खुद को एक बड़ी commercial space कंपनी में बदल लिया। साल 2015 में इसने अपने “Jilin-1” satellite सिस्टम की शुरुआत की। उस समय यह सिर्फ एक Experiment जैसा था, लेकिन आज यही सिस्टम दुनिया के space business में एक मजबूत और भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुका है।
जब भी चीन की अर्थव्यवस्था की बात होती है, ज़्यादातर लोग टेक्नोलॉजी, फैक्ट्रियों और बड़े शहरों के बारे में सोचते हैं। लेकिन पिछले 10–12 सालों में चीन ने एक ऐसे खेल सेक्टर में ज़बरदस्त निवेश किया है, जिसे पहले सिर्फ अमीर लोगों का शौक माना जाता था... वह है विंटर स्पोर्ट्स। आज यही “बर्फ का खेल” चीन की अर्थव्यवस्था में एक नए “सफेद सोने” की तरह चमक रहा है।
आप सोच सकते हैं कि आप घर से बिना बटुआ लिए निकलें और फिर भी पूरा दिन आराम से गुजर जाए? भारत में UPI ने हमें यह आदत सिखाई है। लेकिन चीन में यह कोई नई बात नहीं, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सच कहें तो चीन आज उस दौर में जी रहा है, जहां कैश, कार्ड और काउंटर पीछे छूट चुके हैं। पिछले कुछ सालों में चीन ने खुद को जिस तेजी से बदला है, वह किसी टेक शो से कम नहीं लगता। एक समय था जब चीन को दुनिया की ‘फैक्ट्री’ कहा जाता था, जहां सस्ते खिलौने और कपड़े बनते थे। लेकिन आज चीन दुनिया की डिजिटल लैब बन चुका है। वहां की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी इतनी तेज और दिलचस्प है कि इसे समझना भविष्य में झांकने जैसा लगता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आने वाले समय में फिल्में कैसी होंगी? क्या वे वैसी ही रहेंगी जैसी आज हम देखते हैं, या कुछ ऐसा होगा जो हमें सचमुच चौंका दे? आज सिनेमा की दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। खासकर चीन में, जहां फिल्मों का तरीका तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव की वजह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI।
आज का अंतरिक्ष अब किसी एक देश या सरकार की सीमाओं में बंधा नहीं रहा। पहले जब हम स्पेस की बात करते थे, तो हमारे मन में सिर्फ सरकारी एजेंसियों की छवि उभरती थी... बड़े रॉकेट, भारी बजट और लंबी तैयारी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में उतर चुकी हैं और तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। सच कहें तो अंतरिक्ष अब एक नया “ग्लोबल मार्केट” बन चुका है।
जब भारत में पितृ पक्ष आता है, तो माहौल थोड़ा शांत और भावुक हो जाता है। घरों में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनकी बातें करते हैं, और दिल में एक अपनापन सा महसूस होता है।
चीन का छिंगमिंग पर्व, जिसे ‘टॉम्ब-स्वीपिंग डे’ भी कहा जाता है, पूर्वजों के प्रति सम्मान और स्मरण का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की सफाई करते हैं, फूल अर्पित करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत देता है, जब प्रकृति नए जीवन से भर उठती है। छिंगमिंग हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और परंपराओं का सम्मान करने की प्रेरणा देता है। न्यूज़ स्टोरी में देखिए और जानिए कि छिंगमिंग के अवसर पर पूर्वजों को किस तरह याद किया जाता है...
शनिवार को चीन की राजधानी पेइचिंग में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित डांस-ड्रामा “आदि काव्य” ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कहानियां सीमाओं में नहीं बंधतीं।
आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। देशों के बीच तनाव और व्यापार को लेकर खींचतान बढ़ रही है। कई देश अपनी अर्थव्यवस्था बचाने के लिए टैरिफ और सुरक्षा वाली नीतियाँ अपना रहे हैं, जिससे दुनिया का संतुलन बदल रहा है। ऐसे समय में एशिया एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है। इसी में Boao Forum for Asia जैसे मंच अहम भूमिका निभाते हैं, जो देशों के बीच बातचीत और सहयोग को बढ़ाते हैं। भारत और चीन जैसे बड़े देशों की भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। इन्हीं मुद्दों पर बात करने के लिए हमारे साथ हैं जेएनयू की प्रोफेसर और‘नेशन-स्टेट डायलॉग’की फाउंडर डॉ. गीता कोछड़।
हाल ही में चाइना मीडिया ग्रुप ने नई दिल्ली में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की प्रोफेसर और ‘नेशन-स्टेट डायलॉग’ की संस्थापक डॉ. गीता कोछड़ से विशेष बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने बोआओ फ़ोरम और एशिया की बदलती आर्थिक दिशा पर विस्तार से अपने विचार रखे।