हाल ही में, भारत ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इस सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग और बदलती हुई विश्व व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। लंबे समय बाद दोनों नेताओं की इस मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। इसे समझने के लिए CGTN हिन्दी संवाददाता ने जेएनयू के चीनी अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार से ख़ास बातचीत की।
हाल ही में भारत ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इस समिट पर पूरी दुनिया की नजर थी। वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग और बदलती विश्व व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा हुई चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात की।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस बार भारत की अध्यक्षता का फोकस मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर है। वहीं, BRICS के विस्तार के बाद समूह के भीतर अलग-अलग देशों के रणनीतिक और आर्थिक हित भी सामने आए हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता और इस शिखर सम्मेलन को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए, इसे समझने के लिए CGTN हिन्दी संवाददाता ने जेएनयू की प्रोफेसर और ‘नेशन-स्टेट डायलॉग’ की फाउंडर डॉ. गीता कोछड़ से ख़ास बातचीत की। इस वीडियो में सुनिए यह ख़ास बातचीत…
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है। इस बार भारत की अध्यक्षता का मुख्य फोकस 'मजबूती, नवाचार, सहयोग और सतत विकास' पर केंद्रित है।
सोचिए, एक ऐसा खिलाड़ी जो न थकता है, न हार से निराश होता है। दौड़ना हो, फुटबॉल खेलना हो, टेबल टेनिस में रैकेट चलाना हो, वेटलिफ्टिंग करनी हो या डांस करना हो, ये रोबोट हर मैदान में अपना दम दिखाते नजर आए। पेइचिंग में आयोजित दूसरे वर्ल्ड ह्यूमनॉइड रोबोट्स गेम्स में विज्ञान और खेल का ऐसा अनोखा संगम देखने को मिला। क्या रोबोट भविष्य में इंसानों के साथ खेल के मैदान में भी मुकाबला करेंगे? देखिए, इस खास वीडियो में...
सोचिए, आपके सामने एक ऐसा खिलाड़ी खड़ा है, जिसे न थकान होती है और न हार के बाद निराशा। वह दौड़ सकता है, फुटबॉल खेल सकता है, टेबल टेनिस में रैकेट चला सकता है, वेटलिफ्टिंग कर सकता है और डांस भी कर सकता है। सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म का दृश्य लगता है, लेकिन चीन की राजधानी पेइचिंग में हाल ही में यह सब हकीकत में देखने को मिला।
दुनिया तेजी से बदल रही है। एक तरफ देश अलग-अलग गुटों में बंटते दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में यह सवाल अहम हो जाता है कि आखिर बदलती दुनिया को आगे कैसे चलाया जाए? क्या इसकी दिशा कुछ बड़े देश ही तय करेंगे, या दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की भी इसमें बराबर की भागीदारी होगी? इसी सवाल के बीच शांगहाई सहयोग संगठन यानी एससीओ की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
क्या आपने कभी सोचा है कि चीन में बच्चों के स्कूल का पहला दिन कैसा होता है? नई किताबें, नई यूनिफॉर्म, सुबह-सुबह खास नाश्ता और स्कूल पहुंचते ही फ्लैग-रेजिंग सेरेमनी!
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना हाथ लगाए, सिर्फ अपने दिमाग से कंप्यूटर चलाया जा सकता है? या केवल सोचकर किसी रोबोटिक हाथ को हरकत में लाया जा सकता है? कुछ साल पहले तक यह सब साइंस फिक्शन फिल्मों की कहानी जैसा लगता था। लेकिन आज यह हकीकत बन चुका है। इसके पीछे है एक बेहद दिलचस्प तकनीक, जिसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस यानी BCI कहा जाता है।
भारत के दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका (नई दिल्ली) के छात्र और शिक्षक BRICS शैक्षिक दौरे के तहत चीन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने चीन की आधुनिक तकनीक, ऐतिहासिक धरोहरों और रोजमर्रा की जीवनशैली को करीब से देखा। छात्रों और शिक्षकों ने ग्रेट वॉल और फॉरबिडन सिटी जैसी ऐतिहासिक जगहों का दौरा किया और चीन के तेजी से हो रहे आधुनिक विकास को भी करीब से समझा। हालांकि, इस यात्रा के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया चीनियों का अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति लगाव और आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन।
चीन का महानगर शांगहाई इन दिनों सिर्फ चीन के आर्थिक और कारोबारी केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया भर के सीफूड कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में भी नजर आ रहा है।
हाल ही में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका के बच्चों और टीचर्स की एक टीम ब्रिक्स (BRICS) देशों के एजुकेशन और कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चीन आयी थी। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने चीन की नई टेक्नोलॉजी, मशहूर ऐतिहासिक जगहों और चीनी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा और समझा। इस खास यात्रा के अनुभवों और उद्देश्यों को जानने के लिए हमने स्कूल की टीचर हेमा कपूर से बात की। आइए देखते हैं यह खास बातचीत।