क्या आपने कभी सोचा है कि चीन में बच्चों के स्कूल का पहला दिन कैसा होता है? नई किताबें, नई यूनिफॉर्म, सुबह-सुबह खास नाश्ता और स्कूल पहुंचते ही फ्लैग-रेजिंग सेरेमनी!
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना हाथ लगाए, सिर्फ अपने दिमाग से कंप्यूटर चलाया जा सकता है? या केवल सोचकर किसी रोबोटिक हाथ को हरकत में लाया जा सकता है? कुछ साल पहले तक यह सब साइंस फिक्शन फिल्मों की कहानी जैसा लगता था। लेकिन आज यह हकीकत बन चुका है। इसके पीछे है एक बेहद दिलचस्प तकनीक, जिसे ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस यानी BCI कहा जाता है।
भारत के दिल्ली पब्लिक स्कूल, द्वारका (नई दिल्ली) के छात्र और शिक्षक BRICS शैक्षिक दौरे के तहत चीन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने चीन की आधुनिक तकनीक, ऐतिहासिक धरोहरों और रोजमर्रा की जीवनशैली को करीब से देखा। छात्रों और शिक्षकों ने ग्रेट वॉल और फॉरबिडन सिटी जैसी ऐतिहासिक जगहों का दौरा किया और चीन के तेजी से हो रहे आधुनिक विकास को भी करीब से समझा। हालांकि, इस यात्रा के दौरान उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया चीनियों का अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति लगाव और आधुनिकता के साथ परंपरा का संतुलन।
चीन का महानगर शांगहाई इन दिनों सिर्फ चीन के आर्थिक और कारोबारी केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया भर के सीफूड कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में भी नजर आ रहा है।
हाल ही में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका के बच्चों और टीचर्स की एक टीम ब्रिक्स (BRICS) देशों के एजुकेशन और कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चीन आयी थी। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने चीन की नई टेक्नोलॉजी, मशहूर ऐतिहासिक जगहों और चीनी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा और समझा। इस खास यात्रा के अनुभवों और उद्देश्यों को जानने के लिए हमने स्कूल की टीचर हेमा कपूर से बात की। आइए देखते हैं यह खास बातचीत।
हाल ही में दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), द्वारका के बच्चों और टीचर्स की एक टीम ब्रिक्स (BRICS) देशों के एजुकेशन और कल्चर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चीन आयी थी। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने चीन की नई टेक्नोलॉजी, मशहूर ऐतिहासिक जगहों और चीनी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा और समझा। इस खास यात्रा के अनुभवों और उद्देश्यों को जानने के लिए हमने स्कूल की टीचर मोनिका शर्मा से बात की। आइए देखते हैं यह खास बातचीत।
क्या आपने कभी सोचा है कि बिना हाथ लगाए, सिर्फ अपने दिमाग से Computer चलाया जा सकता है? या फिर सिर्फ सोचकर किसी Robotic Hand को हरकत में लाया जा सकता है? कुछ साल पहले तक यह सब Science Fiction फिल्मों की कहानी लगता था। लेकिन आज यह तकनीक धीरे धीरे हकीकत बन रही है। इसके पीछे है एक बेहद दिलचस्प तकनीक, जिसका नाम है Brain Computer Interface, यानी BCI। आइए, इस वीडियो में आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर BCI क्या है, यह कैसे काम करता है और भविष्य में हमारी जिंदगी को किस तरह बदल सकता है....
क्या आपको भी लगता है कि चाइना दुनिया के बाज़ारों पर सिर्फ इसलिए कब्ज़ा कर रहा है क्योंकि वहां सामान सस्ते में बनता है? अगर हाँ, तो शायद आप एक बहुत बड़ी सच्चाई से अनजान हैं। आजकल पश्चिमी देशों में एक नया शब्द गूंज रहा है—"चाइना शॉक 2.0"। दावा यह है कि चाइना की सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बैटरियां और सोलर पैनल दुनिया भर की नौकरियों और उद्योगों को खा रहे हैं। लेकिन क्या वाकई कहानी सिर्फ इतनी ही है, या इसके पीछे कोई और वजह है? चलिए, आज की न्यूज़ स्टोरी में इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं….
क्या आपने कभी कोई ऐसी झील देखी है, जो इतनी विशाल हो कि समंदर जैसी लगे? एक ऐसी जगह, जहाँ आसमान का नीला रंग और ज़मीन की खूबसूरती आपस में गले मिलते हों? अगर नहीं, तो आज हम आपको ले चलते हैं चीन की एक ऐसी ही छिपी हुई खूबसूरत जगह की सैर पर, जिसका नाम है छिंगहाई झील। लगभग 4,500 वर्ग किलोमीटर से भी ज़्यादा में फैली यह झील न सिर्फ़ चीन की सबसे बड़ी झील है, बल्कि देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील भी मानी जाती है। यह समुद्र तल से करीब 3,200 मीटर की ऊंचाई पर, तिब्बती पठार की गोद में बसी हुई है। यानी यह सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि ऊंचाइयों में छिपी एक पूरी प्राकृतिक दुनिया है।
अगर कोई आपसे पूछे कि तिब्बती पठार की यात्रा कहां से शुरू होती है, तो जवाब होगा, शीनिंग। चीन के छिंगहाई प्रांत की राजधानी शीनिंग (XINING) को यूं ही "Gateway to Tibetan Plateau" यानी तिब्बती पठार का प्रवेश द्वार नहीं कहा जाता। सदियों से यह शहर लोगों, संस्कृतियों और व्यापारिक रास्तों को जोड़ता आया है। आज भी चीन के भीतरी इलाकों को शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश से जोड़ने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण परिवहन और पर्यटन केंद्र है। पूरी कहानी जानिए इस वीडियो में...
चीन के पश्चिमी हिस्से में बनी छिंगहाई-शीत्सांग रेलवे को दुनिया इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार मानती है। ऊंचे पहाड़ों, जमी हुई जमीन और बर्फीले इलाकों से होकर गुजरने वाली यह रेलवे सिर्फ लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का साधन नहीं है। इसने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी है। इस रेलवे ने दूर-दराज के गांवों को शहरों से जोड़ा, कारोबार को बढ़ावा दिया और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और विकास के नए मौके पैदा किए। इसके अलावा, रेलवे के आसपास करीब 10 औद्योगिक पार्क भी बनाए गए हैं, जिससे पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली है। पूरी कहानी जानिए इस वीडियो में….
किसी भी देश की असली ताकत सिर्फ उसकी सेना या जीडीपी में नहीं छिपी होती। उसकी ताकत इस बात में भी होती है कि वह अपने उत्पादों को कितनी तेजी और कितनी आसानी से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा सकता है। पश्चिमी चीन के छिंगहाई प्रांत की राजधानी शीनिंग में बना श्वांगचाई लॉजिस्टिक्स सेंटर (SHUANGZHAI LOGISTICS CENTER) इसी बदलाव की कहानी बयां करता है। यह सिर्फ एक माल ढुलाई केंद्र नहीं, बल्कि पश्चिमी चीन को वैश्विक व्यापार से जोड़ने वाला एक अहम प्रवेश द्वार बन चुका है। आखिर इस लॉजिस्टिक्स सेंटर ने पश्चिमी चीन की तस्वीर कैसे बदली? इसकी सफलता के पीछे क्या राज है? पूरी कहानी जानिए इस वीडियो में….