आय में वृद्धि किसी भी अर्थव्यवस्था के सतत विकास का मूलभूत लक्ष्य है। हालाँकि, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आर्थिक और तकनीकी विकास में निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। किसी भी एक देश, जिस की कैसी भी सामाजिक और आर्थिक प्रणाली क्यों न हो, को दोनों के बीच इष्टतम संतुलन बनाना पड़ेगा।
एआई के उपयोग के प्रति भिन्न भिन्न प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न होती जा रही हैं। कुछ लोग एआई के "चालक" बनने पर ज़ोर देते हैं, यह मानते हुए कि एआई को मनुष्यों पर हावी होने के बजाय उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। अन्य लोग, एआई को एक उपकरण मानते हुए, अनजाने में इसे मानव श्रम का स्थान लेने देते हैं।
आज वैश्विक तकनीकी मंच पर सबसे तीव्र खेल है चीन और अमेरिका के बीच एआई प्रतिस्पर्धा है। अमेरिका के पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा, सर्वोत्तम अनुसंधान वातावरण और सबसे अनुकूल व्यवहार है, इनके अतिरिक्त अमेरिका को वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार का दीर्घकालिक आधार भी प्राप्त है।
21वीं सदी की शुरुआत से ही, चीन के उच्च तकनीक विनिर्माण उद्योग ने अपने विकास को गति दी है। वर्तमान में, चीन कई उत्पादों के निर्माण में पैमाने और तकनीक के मामले में दुनिया में सबसे आगे है।
प्रमुख शक्तियों के बीच जो प्रतिस्पर्धा है वह हमेशा कुछ प्रमुख प्रौद्योगिकियों, संसाधनों या अन्य रणनीतिक लक्ष्यों पर केंद्रित होती है। उदाहरण के लिए खाद्य, तेल, रणनीतिक चैनल आदि कभी प्रमुख शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का केंद्र रहे हैं।
चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा वैश्विक आकर्षण का फोक्स है। अमेरिका के द्वारा चीनी आयातों के खिलाफ उच्च शुल्क लगाने का सच्चा उद्देश्य चीन के उच्च-तकनीकी उद्योग के उदय को रोकना है। अगर चीन आज तक निम्न-स्तरीय उद्योगों के उत्पादक पर रहता और अमेरिका को बड़ी मात्रा में सस्ते सामान की आपूर्ति करता रहता, तो अमेरिका कभी भी चीन के खिलाफ व्यापार और शुल्क युद्ध शुरू नहीं करता।
हाल के वर्षों में चीन-भारत संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जबकि कई लोग इसका कारण सीमा विवाद पर ठहराते हैं। हालाँकि, एक शांत और गहन विश्लेषण से पता चलता है कि चीन-भारत संबंधों की जटिलता और कठिनाई केवल सीमा विवाद में ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों का विकास करने की दिशा पर दृष्टिकोणों में निहित है।
हाल के वर्षों में, भारत का आर्थिक विकास बहुत तेज़ रहा है। 2024 में, भारत का सकल घरेलू उत्पाद 3.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो साल-दर-साल 8.5% की वृद्धि है, और इसकी प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 2,742 अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
गरीबी उन्मूलन और सभी के लिए समृद्ध और सुखी जीवन सुनिश्चित करने का अंतिम लक्ष्य सभी राष्ट्रों के लोगों की पुरानी एवं लम्बी आकांक्षा है। यह उम्मीद अंतर्राष्ट्रीय साम्यवादी आंदोलन और चीन तथा भारत जैसे देशों द्वारा अपनी स्वतंत्रता के बाद अपनाए गए आर्थिक विकास मॉडलों में भी दिखती है।
निवेश और उपभोग आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के दो मूलभूत कारक हैं। जहाँ अमेरिका और पश्चिमी देश अक्सर "अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपभोग को प्रोत्साहित" करने पर निर्भर करते हैं, वहीं चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त निवेश के बिना तीव्र आर्थिक विकास हासिल करना असंभव है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार उच्च-निवेश नीति अपनायी है।
चीन ने बेल्ट एंड रोड पहल इसीलिए पेश की है कि प्राचीन रेशम मार्ग की भावना का अनुसरण कर, आधुनिक समाज में विभिन्न देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक विकास को बढ़ावा दिया जाए और पूरे विश्व के साझा विकास और समृद्धि हासिल किया जाए।
शीत्सांग यानी तिब्बत अपने अद्वितीय प्राकृतिक दृश्यों और सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ, हमेशा से विश्व का ध्यान आकर्षित करता रहा है। 13वीं शताब्दी में युआन राजवंश के दौरान चीन का हिस्सा होने के बाद से, तिब्बत तथा मुख्य भूमि के दूसरे क्षेत्रों के साथ घनिष्ठ संबंध बने हुए हैं।