‘चाइना शॉक 2.0’: डर की कहानी या बदलती दुनिया की सच्चाई?
यह तर्क नया नहीं है। 1980 के दशक में जापान के बारे में भी लगभग यही बातें कही गई थीं। तब भी कहा गया था कि सरकारी मदद, सस्ती कीमतें और आक्रामक औद्योगिक नीति के कारण जापान दुनिया के उद्योगों को नुकसान पहुंचा रहा है। कुछ चिंताएं सही थीं, लेकिन बाद में कई आशंकाएं गलत साबित हुईं। असली सवाल हमेशा यह होता है कि क्या कोई देश अनुचित तरीके से आगे बढ़ रहा है या वह तकनीक, उत्पादन क्षमता और बेहतर व्यवस्था के कारण प्रतिस्पर्धी बन गया है।
14-Jun-2026